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वेद · छठा अध्याय · म्यूचुअल फ़ंड

म्यूचुअल फ़ंड के प्रकार: इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और इंडेक्स — आसान हिंदी में

भारत में हज़ारों म्यूचुअल फ़ंड स्कीमें हैं, पर SEBI ने उन्हें कुछ तय श्रेणियों में बाँट रखा है। हर श्रेणी का नियम है कि पैसा कहाँ और कितना लगेगा। श्रेणी समझ ली, तो किसी भी फ़ंड का नाम सुनकर आप जान जाएँगे कि वह है क्या — बिना किसी के बताए।

पढ़ने में 8 मिनट 24 अक्टूबर 2026 100% AI द्वारा लिखा गया कोई सलाह नहीं
पहले यह पढ़ लीजिए

यहाँ किसी फ़ंड का नाम नहीं है, और "कौन सा सबसे अच्छा" भी नहीं। हर श्रेणी किसी के लिए सही है और किसी के लिए ग़लत — यह आपकी ज़रूरत, समय और जोखिम सहने की ताक़त पर निर्भर है। यह पेज सिर्फ़ यह बताता है कि कौन सी श्रेणी क्या है।

पहले तीन बातें जो हर फ़ंड पर लागू हैं

  • लार्ज, मिड, स्मॉल कैप: मार्केट कैप के हिसाब से सबसे बड़ी 100 कंपनियाँ लार्ज कैप, अगली 150 मिड कैप, बाक़ी स्मॉल कैप।
  • रिस्क-ओ-मीटर: हर फ़ंड को Low से Very High तक छह स्तरों में अपना जोखिम दिखाना होता है। फ़ॉर्म पर यह ज़रूर देखिए।
  • हर श्रेणी में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान: एक ही फ़ंड, अलग ख़र्च। निवेश की शुरुआत में विस्तार है।

इक्विटी फ़ंड — शेयरों वाले

श्रेणीपैसा कहाँ (SEBI की सीमा)ध्यान रखिए
लार्ज कैपकम से कम 80% बड़ी कंपनियों मेंइंडेक्स से बेहतर करना इसके लिए मुश्किल रहा है, जबकि ख़र्च ज़्यादा
मिड कैपकम से कम 65% मझोली कंपनियों मेंउतार-चढ़ाव ज़्यादा
स्मॉल कैपकम से कम 65% छोटी कंपनियों मेंसबसे तेज़ गिरावट; कई साल का धैर्य चाहिए
लार्ज और मिड कैपकम से कम 35-35% दोनों में
मल्टी कैपकुल कम से कम 75% शेयरों में, जिसमें कम से कम 25-25-25% लार्ज, मिड, स्मॉलस्मॉल का हिस्सा हमेशा रहेगा
फ़्लेक्सी कैपकम से कम 65% शेयरों में, किसी भी साइज़ की कंपनीमैनेजर की मर्ज़ी पर बहुत कुछ
फ़ोकस्डज़्यादा से ज़्यादा 30 शेयर; कम से कम 80% शेयरों मेंकम शेयर = एक-एक शेयर का असर ज़्यादा
वैल्यूसस्ते दिखते शेयर; कम से कम 80% शेयरों मेंलंबे समय तक पीछे रह सकता है
कॉन्ट्राबाज़ार की चाल के उलट; कम से कम 80% शेयरों मेंएक AMC दोनों रख सकती है, बशर्ते दोनों के पोर्टफ़ोलियो 50% से ज़्यादा एक जैसे न हों
डिविडेंड यील्डज़्यादा डिविडेंड देने वाली कंपनियाँ; कम से कम 80% शेयरों मेंडिविडेंड पर टैक्स आपकी स्लैब से
सेक्टोरलकम से कम 80% एक सेक्टर मेंसबसे संकरा दाँव
थीमैटिककम से कम 80% एक थीम में (थीम कई सेक्टर मिलाकर हो सकती है)नई थीम अक्सर उफ़ान के वक़्त लॉन्च होती है। अब सेक्टोरल/थीमैटिक का पोर्टफ़ोलियो दूसरी इक्विटी स्कीमों से 50% से ज़्यादा मेल नहीं खा सकता
ELSSकम से कम 80% शेयरों में, 3 साल का लॉक-इनटैक्स छूट सिर्फ़ पुरानी टैक्स व्यवस्था में

डेट फ़ंड — बॉन्ड और क़र्ज़ वाले काग़ज़

ये सरकार या कंपनियों को दिए क़र्ज़ (बॉन्ड, ट्रेज़री बिल वग़ैरह) में पैसा लगाते हैं। इनमें दो जोखिम हैं: ब्याज दर का जोखिम (लंबी अवधि वाले बॉन्ड की क़ीमत दरें बढ़ने पर ज़्यादा गिरती है) और क्रेडिट जोखिम (क़र्ज़ लेने वाला चुका न पाए)।

श्रेणीक्याजोखिम का स्वभाव
ओवरनाइटएक दिन में पकने वाले काग़ज़सबसे कम
लिक्विड91 दिन तक में पकने वाले काग़ज़कम; कई लोग इमरजेंसी के एक हिस्से के लिए देखते हैं
अल्ट्रा शॉर्ट टर्मपोर्टफ़ोलियो की अवधि (Macaulay duration) 3–6 महीनेकम
अल्ट्रा शॉर्ट टू शॉर्ट टर्मअवधि 6–12 महीनेकम से मध्यम
मनी मार्केटएक साल तक में पकने वाले मनी मार्केट काग़ज़कम से मध्यम
शॉर्ट / मीडियम / मीडियम टू लॉन्ग / लॉन्ग टर्मअवधि 1–3 साल / 3–4 / 4–7 / 7 साल से ज़्यादाअवधि जितनी लंबी, ब्याज दर का असर उतना ज़्यादा
डायनेमिक टर्ममैनेजर अवधि बदलता रहता हैमैनेजर के अंदाज़े पर निर्भर
कॉर्पोरेट बॉन्डकम से कम 80% AA+ और उससे ऊपर की रेटिंग वाले कंपनी बॉन्डक्रेडिट जोखिम कम
बैंकिंग और PSUकम से कम 80% बैंक, PSU, सरकारी वित्तीय संस्थाओं और म्युनिसिपल बॉन्ड मेंक्रेडिट जोखिम कम
क्रेडिट रिस्ककम से कम 65% AA और उससे नीचे की रेटिंग वाले कंपनी बॉन्ड में (AA+ छोड़कर)ज़्यादा ब्याज, ज़्यादा डूबने का ख़तरा — "डेट" नाम से सुरक्षित मत समझिए
गिल्टकम से कम 80% सरकारी प्रतिभूतियाँक्रेडिट जोखिम लगभग नहीं, पर ब्याज दर का जोखिम पूरा
10 साल कॉन्स्टेंट मैच्योरिटी गिल्टकम से कम 80% सरकारी प्रतिभूतियाँ, अवधि 10 सालब्याज दर का जोखिम काफ़ी
फ़्लोटरकम से कम 65% बदलती ब्याज दर वाले काग़ज़दरें बढ़ने पर कम असर
सेक्टोरल डेट (2026 में नई)कम से कम 80% एक सेक्टर के AA+ और ऊपर वाले बॉन्ड — वित्त, ऊर्जा, इन्फ़्रा, हाउसिंग या रियल एस्टेटएक सेक्टर पर निर्भरता

हाइब्रिड फ़ंड — दोनों का मेल

श्रेणीशेयरों का हिस्साध्यान रखिए
कंज़र्वेटिव हाइब्रिड10–25%, बाक़ी डेटज़्यादातर डेट जैसा
बैलेंस्ड हाइब्रिड40–60%
एग्रेसिव हाइब्रिड65–80%ज़्यादातर इक्विटी जैसा
डायनेमिक एसेट एलोकेशन / बैलेंस्ड एडवांटेजबदलता रहता हैफ़ॉर्मूला या मैनेजर तय करता है
मल्टी एसेटकम से कम तीन एसेट, हर एक में कम से कम 10%सोना वग़ैरह भी हो सकता है
आर्बिट्राजकम से कम 65% शेयरों में, नक़द और F&O बाज़ार के भाव का छोटा फ़र्क़ कमाने के लिएडेट जैसा व्यवहार, पर इक्विटी की तरह टैक्स
इक्विटी सेविंग्सकम से कम 65% शेयरों में, पर बिना हेज वाला हिस्सा सिर्फ़ 15–40%; कम से कम 10% डेटशेयर, आर्बिट्राज और डेट का मिश्रण

बाक़ी श्रेणियाँ

श्रेणीक्या
इंडेक्स फ़ंडकम से कम 95% उसी इंडेक्स के शेयरों में, उसी अनुपात में; मैनेजर चुनाव नहीं करता, ख़र्च आमतौर पर सबसे कम
ETFइंडेक्स फ़ंड जैसा, पर एक्सचेंज पर शेयर की तरह; डीमैट चाहिए
फ़ंड ऑफ़ फ़ंड्स (FoF)कम से कम 95% दूसरे फ़ंड में; दोनों स्तरों का ख़र्च देखिए
लाइफ़ साइकिल फ़ंड (2026 में नई)तय मैच्योरिटी तारीख़ वाला, लक्ष्य के लिए; समय के साथ शेयर से डेट की तरफ़ अपने आप खिसकता है (glide path)

बंद हुई श्रेणी: रिटायरमेंट और चिल्ड्रन फ़ंड वाली "सॉल्यूशन-ओरिएंटेड" श्रेणी 26 फ़रवरी 2026 से बंद है। ऐसी पुरानी स्कीमें नया पैसा नहीं ले सकतीं और मिलती-जुलती स्कीमों में मिलाई जाएँगी। कोई आज भी "रिटायरमेंट फ़ंड" बेचे, तो पूछिए कि यह असल में किस श्रेणी में है।

एक्टिव बनाम पैसिव — सबसे ज़रूरी बहस

एक्टिव फ़ंड में मैनेजर इंडेक्स से बेहतर करने के लिए शेयर चुनता है, और इसकी फ़ीस लेता है। पैसिव फ़ंड (इंडेक्स फ़ंड, ETF) बस इंडेक्स को कॉपी करता है।

S&P की SPIVA जैसी नियमित रिपोर्टें बार-बार दिखाती हैं कि भारत में भी, ख़ासकर बड़ी कंपनियों वाली श्रेणी में, लंबे समय में ज़्यादातर एक्टिव फ़ंड अपने इंडेक्स से पीछे रहे। यह वही बात है जो इस साइट की हर जाँच में आती है: पिछले साल का विजेता चुनना संयोग की मशीन से विजेता चुनने जैसा है, पर ख़र्च हर साल पक्का कटता है।

इसका मतलब यह नहीं कि हर एक्टिव फ़ंड ख़राब है — इसका मतलब यह है कि ज़्यादा ख़र्च तभी ठीक है जब आपके पास यह मानने की ठोस वजह हो कि वह ख़र्च वसूल होगा।

फ़ंड के काग़ज़ों में क्या देखें

  • श्रेणी — ऊपर की किस लाइन में है?
  • रिस्क-ओ-मीटर — आपकी जोखिम सहने की ताक़त से मेल खाता है?
  • Expense ratio — डायरेक्ट और रेगुलर दोनों का।
  • एग्ज़िट लोड और लॉक-इन — कब तक पैसा बँधा रहेगा?
  • बेंचमार्क — फ़ंड किस इंडेक्स से अपनी तुलना करता है, और लंबे समय में उससे कैसा रहा?

"पिछले एक साल का रिटर्न" इस सूची में सबसे आख़िर में आता है, और अक्सर बिल्कुल नहीं।

आगे पढ़िए

ज़रूरी सूचना

यह पेज सिर्फ़ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं। यहाँ किसी शेयर, फ़ंड, स्कीम, बीमा या ब्रोकर का नाम लेकर कोई सिफ़ारिश नहीं की गई है, और आगे कितना मिलेगा इसका कोई दावा नहीं है। नियम और टैक्स की दरें बदलती रहती हैं — कोई भी फ़ैसला लेने से पहले ताज़ा नियम ख़ुद जाँचिए।

हम SEBI में रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार या रिसर्च एनालिस्ट नहीं हैं। यह पूरा पेज AI ने लिखा है; उसमें ग़लती हो सकती है। बाज़ार में जोखिम है — कोई भी फ़ैसला लेने से पहले SEBI-रजिस्टर्ड सलाहकार से बात कीजिए।