1,646 बैकटेस्ट, 30 मुनाफ़े में, और एक भी सच नहीं
हमने वह सब आज़माया जो इंट्राडे में सिखाया जाता है — मूविंग एवरेज, ब्रेकआउट, RSI, बोलिंजर, मोमेंटम। 742 दिन का डेटा। तीस नियम मुनाफ़े में निकले। फिर हमने उन तीस को जाँचा।
1,646 नियम आज़माए। 30 मुनाफ़े में दिखे। ठीक से जाँचने पर एक भी नहीं टिका।
30 का मिलना कोई ख़ुशख़बरी नहीं थी। हज़ारों नियम आज़माएँगे तो कुछ का अच्छा निकलना तय है — डेटा में कोई पैटर्न हो या न हो।
और जो एक सबसे भरोसेमंद लगा था, वह आख़िर में हमारे अपने कोड की एक लाइन की ग़लती निकला।
पहले समझिए कि 30 मिलना बुरी ख़बर क्यों है
हमने 823 अलग-अलग नियम बनाए और उन्हें दो इंडेक्स पर चलाया — कुल 1,646 जाँच। इनमें वे सब चीज़ें थीं जो यूट्यूब और कोर्स में सिखाई जाती हैं: मूविंग एवरेज के हर जोड़े, चैनल ब्रेकआउट, सुबह की रेंज का ब्रेकआउट, RSI के हर सेटिंग, बोलिंजर बैंड, मोमेंटम, और दिन के हर समय पर ख़रीदने-बेचने के तमाम जोड़।
अब सोचिए। अगर आप 1,646 सिक्के 742-742 बार उछालें, तो कुछ सिक्कों के नतीजे शानदार पैटर्न बनाएँगे ही। यह उन सिक्कों की ख़ूबी नहीं है। यह सिर्फ़ इस बात का नतीजा है कि उछाल बहुत सारे थे।
इसीलिए जब कोई बैकटेस्ट दिखाए, तो असली सवाल यह नहीं है कि "क्या कोई नियम मुनाफ़े में मिला?"
असली सवाल यह है: "जितने मिलने ही चाहिए थे, उससे ज़्यादा मिले क्या?"
यहाँ जवाब था — नहीं।
हमने कैसे जाँचा
| ख़रीदना कब माना | सिग्नल जिस कैंडल पर बना, उसकी अगली कैंडल पर |
| बेचना कब | दोपहर 3:15 तक हर हाल में, कोई पोज़ीशन रातभर नहीं |
| चार्ज | हर आने-जाने पर — NIFTY में 5 पॉइंट, SENSEX में 16 पॉइंट |
| चुनाव | सिर्फ़ पहले 70% दिनों को देखकर; बाक़ी 30% को छुआ तक नहीं |
सबसे बड़ा सबूत चार्ज लगने से पहले वाला है
जब कोई स्ट्रैटेजी हारती है, तो सबसे आम बहाना यह होता है: "बढ़त तो थी, बस ब्रोकरेज खा गया।"
इसे जाँचने का सीधा तरीक़ा है — चार्ज लगाने से पहले का हिसाब देख लीजिए। अगर वहाँ कमाई है, तो बात सही। अगर वहाँ भी कुछ नहीं, तो बहाना ग़लत है।
| स्ट्रैटेजी | कुल सौदे | चार्ज से पहले | चार्ज | आख़िरी नतीजा |
|---|---|---|---|---|
| मोमेंटम 5/10 | 38,503 | +7,478 | 1,92,515 | −1,85,037 |
| मूविंग एवरेज 5/20 | 12,057 | −2,760 | 60,285 | −63,045 |
| RSI 14 | 10,838 | −2,230 | 54,190 | −56,420 |
हर सौदे पर 0.19 पॉइंट का मतलब है कुछ भी नहीं। और नीचे की दो स्ट्रैटेजी तो चार्ज लगने से पहले ही घाटे में थीं।
यह बात अक्सर उल्टी समझी जाती है, इसलिए साफ़ लिख देते हैं: चार्ज किसी छोटी-सी बढ़त को नहीं खा रहे थे। बढ़त थी ही नहीं।
मिनट की कैंडल पर बाज़ार लगभग सिक्का उछालने जैसा है — आधा मौक़ा ऊपर, आधा नीचे। और ट्रेडिंग उस बराबरी को एक पक्के नुकसान में बदल देती है। जितने ज़्यादा सौदे, उतना पक्का नुकसान। ऊपर की टेबल में यही दिख रहा है: सबसे ज़्यादा सौदे वाली स्ट्रैटेजी ने सबसे ज़्यादा गँवाया।
और फिर वह मिली जो सचमुच असली लगी
उन तीस में से एक नियम हर कसौटी पर खरा उतरा। वह चुनने वाले हिस्से में भी मुनाफ़े में था, और उस हिस्से में भी जिसे हमने चुनते वक़्त छुआ तक नहीं था। और दोनों इंडेक्स पर। यही वह पहचान है जिसे किताबें असली बढ़त की निशानी बताती हैं।
हमने मान लिया था कि मिल गई।
फिर उसे शुरू से, अलग से, दोबारा लिखा गया। और तब पता चला कि कोड में एक जगह पिछले दिन की जानकारी अगले दिन के पहले मिनट में रिस रही थी। भविष्य की जानकारी नहीं — पर ऐसी जानकारी जो उस वक़्त सामने थी ही नहीं। एक लाइन की ग़लती।
NIFTY में। SENSEX में +4,246 से −1,801। पूरी बढ़त एक ग़लती थी।
ग़लती ठीक होने के बाद उसी नियम के बारे में चार और बातें सामने आईं। इनमें से एक भी अकेले काफ़ी थी उसे ख़ारिज करने के लिए:
| कसौटी | नतीजा |
|---|---|
| बिना सिर-पैर वाले 823 नियमों से मुक़ाबला | हमारा −475, उनमें सबसे अच्छा +3,714 — यानी शुद्ध इत्तेफ़ाक़ से भी कमज़ोर |
| मुनाफ़ा कितने दिनों से आया | 222 दिनों में से सिर्फ़ 5 दिन से |
| हर साल एक जैसा चला? | नहीं — साल बदलते ही मुनाफ़ा नुकसान में बदल गया |
| थोड़ा ज़्यादा चार्ज सह पाया? | नहीं — 10 पॉइंट चार्ज पर ही ख़त्म |
इस एक ग़लती के बाद हमने क्या बदला
अब हर जाँच पर एक शर्त और लगती है: कोई भी नियम तब तक "चलने वाला" नहीं माना जाएगा, जब तक वह बिना सिर-पैर वाले सैकड़ों नियमों में से सबसे अच्छे को न हरा दे।
वजह सीधी है। इत्तेफ़ाक़ अपने आप एक स्तर तक अच्छा नतीजा बना ही देता है। जब तक आप उस स्तर से ऊपर नहीं जाते, आपने कुछ खोजा नहीं है।
यही वजह है कि हमारे टूल में "सबसे अच्छी स्ट्रैटेजी" की लिस्ट कभी नहीं होगी। ऐसी लिस्ट आपको ठीक उसी नियम तक पहुँचाती है जो सिर्फ़ इत्तेफ़ाक़ से सबसे ऊपर आ गया था — और फिर आप उस पर पैसा लगाते हैं।
असली सबक
इस पूरी मेहनत का नतीजा यह नहीं है कि "इंट्राडे में कुछ नहीं होता"। नतीजा इससे ज़्यादा असहज है:
बैकटेस्ट में चलने वाला नियम हमेशा मिल जाता है। हमें 30 मिले। अगर हम 10,000 आज़माते, तो और ज़्यादा मिलते। यह बैकटेस्ट की ख़राबी नहीं है — यह उसका स्वभाव है।
इसका सीधा मतलब यह है कि किसी ने आपको जो बैकटेस्ट दिखाया है, वह अपने आप में कोई सबूत नहीं है — जब तक आपको यह न पता चले कि उस एक नतीजे तक पहुँचने में कितने नियम आज़माए गए थे।
जो आपको चमकता हुआ चार्ट दिखाता है, वह यह कभी नहीं बताता कि उसके पीछे कितने चार्ट फेंके गए।
और यह याद रखिए: हमारी सबसे भरोसेमंद दिखने वाली स्ट्रैटेजी, जो हर आम जाँच पार कर गई थी, आख़िर में एक लाइन की ग़लती निकली। हमारे अपने कोड में। हमारी अपनी जाँच में। अगर हमने दोबारा न लिखा होता, तो हम आज भी उसे बढ़त समझ रहे होते।
इस जाँच की कमज़ोरियाँ
यह जाँच सिर्फ़ आसान, नियम वाली इंट्राडे स्ट्रैटेजी पर है — मिनट की कैंडल, एक ही दिन के अंदर, कोई पोज़ीशन रातभर नहीं। यह इस बात का सबूत नहीं है कि हर तरह की ट्रेडिंग बेकार है।
यह इस बात का सबूत है कि जो चीज़ें सबसे ज़्यादा सिखाई और बेची जाती हैं, वे इस डेटा पर, ईमानदारी से जाँचने पर, नहीं टिकीं।
और एक बात दर्ज रहे: हमारी अपनी गिनती में एक ग़लती निकल चुकी है। दूसरी भी हो सकती है। इसीलिए हर रिपोर्ट में तरीका पूरा लिखा जाता है — ताकि आप हम पर भरोसा करने के बजाय ख़ुद जाँच सकें।
आगे पढ़िए
यह पेज सिर्फ़ हमारी की हुई जाँच की रिपोर्ट है। यहाँ कोई निवेश सलाह नहीं है, कोई सिफ़ारिश नहीं है, ख़रीदने-बेचने का कोई सुझाव नहीं है, और आगे कितना मिलेगा इसका कोई दावा नहीं है। किसी शेयर या ऑप्शन का नाम लेकर कोई राय नहीं दी गई है।
हम SEBI में रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार या रिसर्च एनालिस्ट नहीं हैं। यहाँ के सारे आँकड़े बीते हुए डेटा पर की गई गिनती के हैं; असली ट्रेडिंग के नतीजे इनसे अलग होते हैं। बाज़ार में जोखिम है — कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अपने रजिस्टर्ड सलाहकार से बात कीजिए।