जब बिना मतलब का डेटा असली सिग्नल से बेहतर निकला
हमें OI में एक साफ़ रिश्ता मिल गया था — आँकड़ों की भाषा में मज़बूत, और देखने में भरोसेमंद। फिर हमने एक जाँच की जो लगभग कोई नहीं करता: वही हिसाब जान-बूझकर बिगाड़े हुए, बेमतलब डेटा पर भी चलाकर देखा।
हमारा "असली" सिग्नल +0.04 से +0.10 स्कोर कर रहा था, जो काफ़ी मज़बूत लग रहा था।
फिर हमने वही डेटा ताश की तरह फेंट दिया — यानी उसमें से सारा मतलब निकाल दिया। उस बेमतलब डेटा ने +0.15 स्कोर किया। असली सिग्नल से ज़्यादा।
इसका मतलब साफ़ था: ग़लती डेटा में नहीं थी। ग़लती हमारे जाँचने के तरीक़े में थी।
कंट्रोल टेस्ट क्या होता है
दवा की जाँच में एक तरीक़ा होता है: कुछ लोगों को असली दवा दी जाती है और कुछ को सिर्फ़ चीनी की गोली। अगर चीनी की गोली से भी उतना ही फ़ायदा दिखे, तो दवा काम नहीं कर रही।
आँकड़ों में यही काम कंट्रोल टेस्ट करता है। आप अपना पूरा हिसाब एक ऐसे डेटा पर भी चलाते हैं जिसमें आपने जान-बूझकर सारा मतलब ख़त्म कर दिया हो।
अगर बेमतलब डेटा भी उतना ही अच्छा नतीजा दे, तो आपका सिग्नल कुछ नहीं बता रहा। आपका तरीक़ा ही नतीजा बना रहा है।
यह जाँच लगभग कोई नहीं करता, और इसकी वजह सीधी है: यह जाँच आपको बताती है कि आपकी मेहनत बेकार गई। कोई भी अपनी खोज को ख़ुद तोड़ने के लिए उत्सुक नहीं होता।
पर अगर आप यह जाँच नहीं करेंगे, तो कोई और भी नहीं करेगा — और आप एक नक़ली सिग्नल पर पैसा लगा देंगे।
पहला जाल: सारे दिन एक साथ मिला देना
हमारे पास 22 दिनों का मिनट-दर-मिनट डेटा था। हमने सारे दिनों को एक साथ मिलाकर देखा कि ODI का आगे आने वाले रिटर्न से क्या रिश्ता है।
रिश्ता मिला, और मज़बूत मिला। फिर कंट्रोल चलाया:
| क्या जाँचा | स्कोर |
|---|---|
| असली ODI (सारे दिन एक साथ) | +0.04 से +0.10 |
| फेंटा हुआ, बेमतलब ODI | +0.15 |
| असली ODI (हर दिन अलग-अलग देखने पर) | −0.008 |
ऐसा हुआ क्यों
वजह समझने लायक़ है, क्योंकि यह ग़लती बहुत आम है।
मान लीजिए किसी दिन बाज़ार ऊपर गया। उस पूरे दिन ODI भी ऊपर रहेगा, और आगे के रिटर्न भी ऊपर रहेंगे — क्योंकि दोनों एक ही चीज़ से जुड़े हैं, यानी उस दिन की चाल से।
अब अगर आप सारे दिनों को एक साथ मिला देते हैं, तो यह "ऊपर वाले दिन दोनों ऊपर, नीचे वाले दिन दोनों नीचे" एक साफ़ रिश्ता बनकर दिखता है। पर उसमें कोई भविष्यवाणी नहीं है। वह सिर्फ़ यह बता रहा है कि ऊपर वाले दिन ऊपर वाले दिन थे।
और जब हमने डेटा फेंटा, तो फेंटना हर दिन के भीतर हुआ — यानी हर दिन का अपना औसत बरकरार रहा। इसलिए यह नक़ली रिश्ता फेंटने के बाद भी बचा रहा, बल्कि और साफ़ हो गया।
इलाज: हर दिन को उसी दिन के भीतर देखिए। यानी हर दिन का अपना औसत उसमें से हटा दीजिए, और फिर रिश्ता निकालिए।
ऐसा करते ही असली सिग्नल का स्कोर −0.008 पर आ गया। यानी कुछ भी नहीं।
दूसरा जाल: भविष्य की जानकारी चुपके से इस्तेमाल हो जाना
यह और भी महँगा निकला।
हमने एक नियम बनाया जो यह देखता था कि भाव उस दिन के औसत से कितना दूर चला गया है, और फिर उसे उल्टा खेलता था। नतीजा शानदार था:
| वही नियम | NIFTY | SENSEX |
|---|---|---|
| पूरे दिन का औसत इस्तेमाल करके | +26,930 | +93,619 |
| सिर्फ़ उस वक़्त तक की जानकारी से | −25,697 | −67,650 |
NIFTY में यह लगभग 52,000 पॉइंट का उलटफेर है, और चिह्न ही बदल गया।
ग़लती कहाँ थी
"उस दिन का औसत" निकालने के लिए पूरा दिन ख़त्म होना ज़रूरी है। आप सुबह 11 बजे यह नहीं जान सकते कि पूरे दिन का औसत क्या रहेगा — वह तो 3:30 बजे ही पता चलेगा।
पर हमारे हिसाब में 11 बजे के फ़ैसले में पूरे दिन का औसत इस्तेमाल हो रहा था। यानी हम चुपके से भविष्य देख रहे थे, बिना जाने।
इसे ठीक करने का तरीक़ा यह है कि हर पल पर सिर्फ़ उसी पल तक का औसत लिया जाए — यानी औसत दिन के साथ-साथ बनता चले। ऐसा करते ही मुनाफ़ा नुकसान में बदल गया।
यह ठीक वही परिवार है जिसमें वह np.roll वाली ग़लती आती है जिसने हमारी सबसे भरोसेमंद स्ट्रैटेजी को खा लिया था। दोनों में कोई एरर नहीं आता, कुछ लाल नहीं होता — बस एक शानदार नक़ली नतीजा बन जाता है।
दोनों जाल ठीक करने के बाद क्या बचा
अब ईमानदार नतीजा। यही असली तस्वीर है:
| क्या नापा | NIFTY | SENSEX |
|---|---|---|
| ODI बनाम आज की अब तक की चाल (एक ही वक़्त) | +0.70 | +0.76 |
| दिशा का मिलान | 83% | 84% |
| ODI बनाम आगे के 30 मिनट | −0.188 | −0.178 |
| वही, पर भाव को हिसाब में लेकर | −0.052 | −0.014 |
तीसरी लाइन देखकर लगता है कि कुछ मिला — −0.188 का मतलब है कि ODI ऊपर हो तो अगले 30 मिनट में भाव नीचे जाता है। कई लोग यहीं रुककर स्ट्रैटेजी बना लेते।
पर चौथी लाइन वह जाँच है जो असल में मायने रखती है। जैसे ही हम भाव को हिसाब में लेते हैं, वह रिश्ता −0.052 और −0.014 पर आ जाता है — यानी लगभग शून्य।
वह "भविष्यवाणी" असल में भाव का अपने आप वापस लौटना था। ODI उसे सिर्फ़ पीछे-पीछे दोहरा रहा था।
दूसरे शब्दों में: OI आपको उससे ज़्यादा कुछ नहीं बताता जो भाव पहले से मुफ़्त में दिखा रहा है।
NIFTY और SENSEX एक ही सौदा हैं
बहुत लोग सोचते हैं कि दोनों इंडेक्स अलग हैं, और एक की चाल दूसरे के बारे में कुछ बता सकती है। ख़ासकर इसलिए कि उनकी एक्सपायरी अलग-अलग दिन होती है — NIFTY मंगलवार, SENSEX गुरुवार।
0.992 का मतलब है कि वे लगभग एक ही चीज़ हैं। कोई किसी से पहले नहीं चलता, और अलग-अलग एक्सपायरी से भी कोई फ़ायदा उठाने लायक़ फ़र्क़ नहीं बनता।
यानी दोनों में ट्रेड करके आप जोखिम बाँट नहीं रहे। आप एक ही सौदा दो बार कर रहे हैं।
और चार्ज लगाने के बाद
ऊपर की सारी बातें चार्ज से पहले की हैं। चार्ज जोड़ने पर ईमानदार नियम हर हाल में हारा:
| प्रति सौदा नतीजा | |
|---|---|
| NIFTY | −7.8 से −12.3 पॉइंट |
| SENSEX | −19 से −35 पॉइंट |
| ODI की सहमति वाला फ़िल्टर लगाकर | −8.59 (बिना फ़िल्टर −8.18) |
22 में से सिर्फ़ 3 से 10 दिन मुनाफ़े में रहे, और हमने कुल 48 अलग-अलग रिश्ते नापे। इतनी सारी जाँचों के बाद किसी नतीजे को भरोसेमंद कहने के लिए वह बहुत ज़्यादा मज़बूत होना चाहिए — वही सिक्के वाली बात। यहाँ कोई भी उस स्तर तक नहीं पहुँचा।
हमने अपने डेटा को भी जाँचा
एक और बात दर्ज कर देना ज़रूरी है। ऊपर की सारी गिनती के लिए हमने पूरा डेटा दोबारा बनाया — कच्चे रिकॉर्ड से, हर स्ट्राइक को अलग-अलग गिनकर।
फिर हमने जाँचा कि नया बनाया हुआ हिसाब पुराने रिकॉर्ड से मिलता है या नहीं। 590 में से 590 नमूनों पर वह पूरी तरह मिला।
यह जाँच इसलिए ज़रूरी थी क्योंकि हम पहले एक बार OI की गिनती ग़लत कर चुके थे। एक बार ग़लती हो जाने के बाद हर अगली गिनती पर सबूत माँगना पड़ता है।
आप इससे क्या ले जा सकते हैं
अगर आप कभी किसी स्ट्रैटेजी या सिग्नल की जाँच करें — अपनी या किसी और की — तो ये तीन सवाल पूछ लीजिए। हर एक हमें अपनी ही ग़लती से मिला है:
| सवाल | क्यों |
|---|---|
| क्या यही हिसाब बेमतलब डेटा पर भी चलाकर देखा? | अगर वहाँ भी नतीजा अच्छा आता है, तो सिग्नल कुछ नहीं बता रहा |
| क्या हर पल पर सिर्फ़ उतनी ही जानकारी थी जितनी असल में होती? | पूरे दिन का औसत सुबह के फ़ैसले में इस्तेमाल करना भविष्य देखना है |
| भाव को हिसाब में लेने के बाद भी रिश्ता बचता है? | ज़्यादातर "सिग्नल" सिर्फ़ भाव की परछाईं होते हैं |
तीसरा सवाल सबसे ज़्यादा काम का है। बाज़ार में बिकने वाले ज़्यादातर इंडिकेटर भाव से ही बनते हैं। इसलिए वे भाव के साथ-साथ चलते दिखते हैं, और वही साथ-साथ चलना भविष्यवाणी समझ लिया जाता है।
आगे पढ़िए
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