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जाँच रिपोर्ट · F6

आप किसके ख़िलाफ़ ट्रेड कर रहे हैं

बाक़ी रिपोर्टों में हमने दिखाया कि इंट्राडे नियम काम नहीं करते। यह रिपोर्ट बताती है कि क्यों नहीं करते। वजह आपकी स्ट्रैटेजी में नहीं है। वजह उस दूरी में है जो आपके और एक्सचेंज के बीच है।

30 अगस्त 2026 नाप और सार्वजनिक आँकड़े
सीधी बात — अगर सिर्फ़ इतना ही पढ़ना हो

आपका ऑर्डर एक्सचेंज तक 50 से 300 मिलीसेकंड में पहुँचता है। जिन फ़र्मों से आपका मुक़ाबला है, उनका 1 से 10 माइक्रोसेकंड में।

एक मिलीसेकंड में एक हज़ार माइक्रोसेकंड होते हैं। यानी फ़र्क़ कम से कम पाँच हज़ार गुना है।

सेकंड और मिनट वाली टाइमफ़्रेम पर जो भी छोटी बढ़त बनती है, वह आपके देखने से पहले ही उठ चुकी होती है।

पहले रफ़्तार को समझिए

जब आप ऑर्डर लगाते हैं, तो वह आपके फ़ोन से ब्रोकर के सर्वर तक जाता है, वहाँ से एक्सचेंज तक। इसमें आम तौर पर 50 से 300 मिलीसेकंड लगते हैं।

कुछ फ़र्में अपना सर्वर एक्सचेंज के ही डेटा सेंटर में, कुछ मीटर की दूरी पर रखती हैं। इसे कोलोकेशन कहते हैं। उनका ऑर्डर 1 से 10 माइक्रोसेकंड में पहुँच जाता है।

आपकोलोकेटेड फ़र्म
ऑर्डर पहुँचने का समय50–300 मिलीसेकंड1–10 माइक्रोसेकंड
मार्केट डेटाहर कुछ सेकंड में एक झलकलगातार, हर बदलाव
सर्वर कहाँआपका फ़ोन, फिर ब्रोकरएक्सचेंज के अंदर
1 मिलीसेकंड = 1,000 माइक्रोसेकंड। सबसे अच्छी हालत में भी फ़र्क़ 5,000 गुना है।

यह संख्या इतनी बड़ी है कि उसे महसूस करना मुश्किल है, इसलिए एक मिसाल:

मान लीजिए एक दौड़ है। आपको दौड़ने में एक घंटा लगता है।

पाँच हज़ार गुना तेज़ का मतलब है — वह वही दूरी 0.72 सेकंड में पूरी कर लेता है।

अब सोचिए: क्या आप उससे यह उम्मीद कर सकते हैं कि आप कोई मौक़ा पहले देख लेंगे? आप जब तक देखेंगे, वह मौक़ा हज़ारों बार आ-जा चुका होगा।

और आपको वही डेटा भी नहीं मिलता

रफ़्तार से भी बड़ी बात यह है कि आप और वे एक ही बाज़ार नहीं देख रहे।

ब्रोकर के ज़रिए आपको हर कुछ सेकंड में एक झलक मिलती है — जैसे किसी चलती हुई फ़िल्म की बीच-बीच से कुछ तस्वीरें। बीच में जो हुआ, वह आपको कभी नहीं दिखता।

कोलोकेटेड फ़र्म को एक्सचेंज से सीधी, लगातार चलने वाली फ़ीड मिलती है — पूरी फ़िल्म, हर फ़्रेम।

तो जब आपकी स्क्रीन पर भाव "अचानक" कूदता है, तो वह अचानक कूदा नहीं था। वह धीरे-धीरे वहाँ पहुँचा था, और आपको सिर्फ़ पहली और आख़िरी तस्वीर दिखी।

अब देखिए कमाई किसे हो रही है

यह अंदाज़ा नहीं है। यह SEBI के अपने आँकड़े हैं। FY24 में F&O से कमाई का हिसाब:

कौनFY24 में कमाईएल्गो से कितनी
प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स (बड़ी फ़र्में)~₹33,000 करोड़96–97%
विदेशी निवेशक (FPI)~₹28,000 करोड़96–97%
व्यक्तिगत ट्रेडर (आप और हम)−₹1.8 लाख करोड़ (FY22–24)
FY22 से FY24 के बीच 93% व्यक्तिगत ट्रेडर नुकसान में रहे। जो कमाया गया, उसका 96–97% हिस्सा एल्गो के ज़रिए कमाया गया।

इस टेबल को ध्यान से देखिए। यह सिर्फ़ यह नहीं बता रही कि रिटेल हार रहा है। यह बता रही है कि जो जीत रहे हैं, वे लगभग पूरी तरह एल्गो से जीत रहे हैं।

यानी F&O में जो पैसा बन रहा है, वह हाथ से चार्ट देखकर नहीं बन रहा। वह उन मशीनों से बन रहा है जो आपसे हज़ारों गुना तेज़ हैं और आपसे ज़्यादा देख पा रही हैं।

एक मिसाल, जो अभी अदालत में है

जुलाई 2025 में SEBI ने एक बड़ी विदेशी ट्रेडिंग फ़र्म, Jane Street, के ख़िलाफ़ आदेश पारित किया। SEBI का आरोप था कि उस फ़र्म ने जनवरी 2023 से मार्च 2025 के बीच 18 एक्सपायरी दिनों पर इंडेक्स के भाव को प्रभावित किया।

SEBI की गिनती के मुताबिक़ उस दौर में फ़र्म का मुनाफ़ा लगभग ₹36,500 करोड़ रहा, जिसका बड़ा हिस्सा इंडेक्स ऑप्शन से था। SEBI ने ₹4,843 करोड़ जमा कराने को कहा और अस्थायी रोक लगाई।

इसका मौजूदा हाल साफ़ बता देना ज़रूरी है: रक़म जमा होने के बाद रोक हट चुकी है। फ़र्म ने SEBI के आदेश को चुनौती दी है और मामला अभी अपीलीय ट्रिब्यूनल (SAT) में चल रहा है। यानी आरोप अभी तय नहीं हुए हैं। हम यहाँ किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे।

हम यह मिसाल इसलिए दे रहे हैं कि पैमाना समझ में आए। एक फ़र्म का दो साल का मुनाफ़ा ₹36,500 करोड़ — और उसी दौर में लाखों व्यक्तिगत ट्रेडर मिलकर लाख करोड़ से ज़्यादा गँवा रहे थे।

F&O में पैसा हवा से नहीं आता। जो एक तरफ़ से जाता है, वह दूसरी तरफ़ पहुँचता है। सवाल यह है कि आप किस तरफ़ खड़े हैं।

इसका सीधा मतलब क्या निकलता है

हमारी सबसे बड़ी जाँच में 1,646 इंट्राडे नियमों में से एक भी नहीं टिका। उस वक़्त हमें लगा था कि शायद हमने ग़लत नियम चुने।

यह रिपोर्ट बताती है कि नियम ग़लत नहीं थे। जगह ग़लत थी।

सेकंड और मिनट वाली टाइमफ़्रेम में जो भी छोटी-मोटी बढ़त बनती है, वह उन्हीं मशीनों के लिए बनती है जो वहाँ पहले से बैठी हैं। जब तक वह बढ़त आपकी स्क्रीन तक पहुँचती है, वह ख़त्म हो चुकी होती है। यह आपकी काबिलियत का सवाल नहीं है — यह दूरी का सवाल है।

और यहाँ एक बात साफ़ कर देना ज़रूरी है: तेज़ इंटरनेट लेने से यह फ़र्क़ नहीं मिटता। फ़र्क़ आपके इंटरनेट का नहीं है। फ़र्क़ इस बात का है कि उनका सर्वर एक्सचेंज के अंदर रखा है और आपका नहीं।

तो फिर क्या करें

अगर सबसे तेज़ मैदान में जगह नहीं है, तो सीधा सवाल यह बनता है कि बचता क्या है। हमने इसका जवाब अलग से लिखा है — बिना किसी सलाह के, सिर्फ़ वह गणित जो आप ख़ुद देख सकें।

ज़रूरी सूचना

यह पेज सार्वजनिक आँकड़ों और हमारी अपनी नाप पर आधारित है। यहाँ कोई निवेश सलाह नहीं है, कोई सिफ़ारिश नहीं है, और किसी शेयर या ऑप्शन का नाम लेकर कोई राय नहीं दी गई है। किसी कंपनी या फ़र्म पर कोई आरोप हमारा अपना नहीं है — जहाँ नियामक की कार्रवाई का ज़िक्र है, वहाँ उसका मौजूदा हाल भी लिखा है।

हम SEBI में रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार या रिसर्च एनालिस्ट नहीं हैं। बाज़ार में जोखिम है — कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अपने रजिस्टर्ड सलाहकार से बात कीजिए।